New Law MGNREGA : सरकार जल्द लागू करने जा रही है मनरेगा की जगह यह नया कानून, जानिए कोर्ट का फैसला
Newz Fast, New Delhi संसद के शीतकालीन सत्र में इसे पेश करने का प्लान है, जहां पुराने 100 दिनों की जगह 125 दिनों का रोजगार ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। विपक्ष खासकर कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया है, प्रियंका गांधी ने गांधीजी का नाम हटाने पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार इसे विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ रही है।
जी राम जी बिल की मुख्य खासियतें: मनरेगा से आगे की गारंटी
यह नया बिल मनरेगा 2005 को पूरी तरह निरस्त कर देगा, जिसमें हर ग्रामीण परिवार के एक वयस्क सदस्य को जो अकुशल मैनुअल काम करने को तैयार हो, उसे सालाना 125 दिनों का पेड वर्क की कानूनी गारंटी मिलेगी—पुराने 100 दिनों से 25 दिन ज्यादा, जो खासतौर पर खेती के ऑफ-सीजन में ब्रेक पीरियड के साथ आएगा ताकि किसानों को अतिरिक्त कमाई हो सके।
फंडिंग पैटर्न में क्रांति आएगी, जहां अभी मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र उठाता है और सामग्री का 75%, नए कानून में कुल खर्च का 60% केंद्र और 40% राज्य सरकारें देंगी, जिससे राज्यों की जिम्मेदारी बढ़ेगी और दुरुपयोग रुकेगा।
जॉब कार्ड सिस्टम बरकरार रहेगा लेकिन डिजिटल मोनिटरिंग सख्त होगी, ताकि पारदर्शिता आए और भ्रष्टाचार जैसे पुराने मुद्दे खत्म हो जाएं। सरकार का दावा है कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, स्किल्ड वर्क को बढ़ावा देगा और 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करेगा। लोकसभा में सांसदों को ड्राफ्ट भेजा जा चुका है, और पास होते ही पूरे देश में लागू हो जाएगा।
कोर्ट का फैसला: मनरेगा को स्थगित नहीं किया जा सकता, लेकिन नया बिल अलग
कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में मनरेगा फंड रोकने के मामले में केंद्र को झटका दिया, जहां कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद योजना को अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं रखा जा सकता—1 अगस्त 2025 से इसे फिर शुरू करने का आदेश दिया, और सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की SLP खारिज कर दी।
यह फैसला स्पष्ट करता है कि मौजूदा मनरेगा को तत्काल खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन नया जी राम जी बिल उसके स्थान पर आएगा, जिसमें जांच एजेंसियां पुरानी अनियमितताओं पर काम जारी रखेंगी।
कोर्ट ने केंद्र को विशेष शर्तें लगाने की छूट दी, जैसे फंड डिस्बर्सल पर सख्त कंट्रोल, ताकि भविष्य में गबन न हो। बंगाल जैसे राज्यों में जहां योजना तीन साल से बंद थी, अब यह बहाल हो रही है लेकिन नए बिल से सभी राज्य प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह स्टैंड नया कानून लाने में बाधा नहीं बनेगा, बल्कि सुधारों को मजबूती देगा।
New Law MGNREGA विपक्ष का विरोध और सरकार की सफाई: राजनीतिक घमासान शुरू
कांग्रेस ने नए बिल को मनरेगा का अपमान बताया, प्रियंका गांधी ने कहा कि गांधीजी का नाम हटाना गलत है और यह गरीबों के हक पर हमला, जबकि सरकार स्पष्ट कर रही है कि यह नाम बदलाव नहीं बल्कि आधुनिकीकरण है—125 दिन काम, बेहतर फंडिंग शेयरिंग और डिजिटल ट्रैकिंग से ग्रामीणों को ज्यादा फायदा होगा।
राज्यों पर 40% बोझ से कुछ मुख्यमंत्रियों ने चिंता जताई है, लेकिन केंद्र का तर्क है कि इससे लोकल अकाउंटेबिलिटी बढ़ेगी। पिछले साल मनरेगा पर 1 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ, नए बिल से यह और प्रभावी बनेगा। किसान संगठन इसे सकारात्मक मान रहे हैं, क्योंकि ऑफ-सीजन में ज्यादा काम मिलेगा। कुल मिलाकर, यह बदलाव ग्रामीण भारत के लिए नया दौर लाएगा।
